शनिवार, 2 जनवरी 2010

मेन एंड ज्योग्राफी ........


जब आदरणीय गुरूजी ने हमे भूगोल का हर घटना से सम्बन्ध बतलाया ,
तो मैंने भूगोल की कुछ घटनाओ को सामान्य जीवन से जोड़ने का बीड़ा उठाया ,
भूगोल का जीवन से किस प्रकार सम्बन्ध है, कुछ बाते मैंने इस कविता में बतलाई है ,
और भूगोल की कुछ कठिन परिभाषाये सरल शब्दों में समझाई है ।

शादी के बाद जब पहले वर्ष पति मित्रो से बचकर सीधे घर आता हैं ,
तो भूगोल में इस घटना को जलधारा का पूर्ववर्ती अपवाह कहा जाता है ,
और दूसरे वर्ष जब पति मित्रो के कारण १-२ घंटे लेट आये ,
तो यह कार्य उच्चावचो के कारण हुआ धारा का मार्ग परिवर्तन कहलाये ।

तीसरे वर्ष पति ,पत्नी को सहेता है , पूर्ण रूपेण घर से ग़ायब रहेता है,
तो हर भूगोल शास्त्री इसे गृह्जात बलों दवारा हुआ पूर्ण अपरदन कहेता है ।

चोथे वर्ष जब पत्नी को देखकर पति की आँखों में अश्रु आये ,
तो भूगोल में ये घटना उष्ण जल के सोतो का प्रस्फुटन कहेलाये,
लेकिन पति फिर भी जब चुपचाप रहे , हर अत्याचार को सहे,
घर जोड़े रखने के लिए पी जाये अपने सारे गम,
तो यह दशा कहेलाती है गृह संतुलन का नियम ।

और पत्नी जब मायके से अपनी छोटी बहिन को साथ लाएगी ,
तो भूगोल में यह नदी द्वारा निक्षेपित नवीनतम जलोढ़ कहेलाएगी ,
वैसे भूगोलवेताओ में इस बात पर मतभेद रहेते है , कुछ साली को नवीनतम जलोढ़
तो कुछ दलदली भूमि कहेते है,
और साली जी पर राय देने में अर्थशास्त्री भी पीछे नहीं रहेते है ,
कुछ इसे मूल पूंजी पर मिला ब्याज और कुछ अंतरिम राहत कहते है ।

और पत्नी के कोप से हुई धुनाई से पति के सर पर गुमड़ निकल आती है,
तो ये घटना अन्तर्जात बलों द्वारा सर रूपी धरातल पर उत्पन वलन कहेलाती है,
जगह-जगह उभरी ये आकृतिया पंखाकार वलन कहेलाती है,
कपड़ो के नीचे दबे वलनो को बंद वलन कहते है,
और जब ये भुआक्रतिया मुखमंडल पर उभर आती है तो इन्हें खुले वलन की संज्ञा दी जाती है,
बेलन की मार से जब पति की हड्डिया मूल स्थान से चटक जाती है
ये घटना भूगोल में फाल्टिंग अर्थात भ्रन्शन कहेलाती है।

पत्नी को जब पति की आँखे किसी सुंदरी के मुखमंडल का दर्शन करते दिख जाती है ,
तो विश्वास की प्लेट सरकने के कारण सारे घर की दीवारे हिल जाती है ,
पत्नी के गुस्से के कारण घर में भूकंप आता है,
उस सुंदरी का मुखमंडल भूकंप का अधिकेन्द्र कहेलाता है।

मौसम के प्रभाव से और सामाजिक तनाव से
जब बालो का टूटना शुरू हो जाता है,
भूगोल में यह प्रक्रम आनाछादन कहेलाता है।

कभी कभी पति भी गुस्से में आता है , मुख रूपी शंकु से लावा बरसाता है ,
भूगोलवेता इस घटना को कुछ यु कहेते है,
सुसुप्त ज्वालामुखियों से भी यदा कदा उदगार होते रहते है,
इस उदगार को समुद्र विज्ञान में ज्वार कहते है ,
ज्वारोत्पति के बाद शांत हुए पति को भाटा कहते है।

जैसे भारतीय अर्थ व्यवस्था निर्भर है मानसून पर ,
उसी तरह गृहस्थी भी निर्भर है वेतन पर ,
वेतन के अतिरिक्त कर्मचारी जब अन्डर दी टेबल
गाँधी जी के कुछ कागजी फोटो पा जाता है,
भूगोल में यह प्रक्रम लोटते हुए मानसून का वर्षण कहलाता है ,
तनख्वाह की तारीख पर पत्नी की मुश्कान का राज भूगोलवेता यु समझाते है,
चक्रवात वाले क्षेत्रो में भी कभी कभी प्रति-चक्रवात आ जाते है।

४० वर्ष की उम्र में महिलाओं की सुन्दरता का राज भूगोलवेता कुछ यु समझाते है ,
उच्च मेक-अप के प्रभाव से प्राचीन आग्नेय शैल भी कायांतरित हो जाते है ।

दम्पति के जीवन में जब पुत्र- रत्न आ जाता है,
आर्थिक भूगोल में यह पुत्र संसाधन कहलाता है ,
इस पुत्र रूपी संसाधन की शादी में मोटी रकम लेते है ,
तो समस्त भूगोलवेता इसे मुद्रा दायनी फसल कहते है।

जब युवा शिक्षित होने के बावजूद घर पर खली बेठे रहते है,
भूगोल की भाषा में इन युवाओ को अयस्क कहते है,
जब युवा परिश्रम रूपी शोधन से रोजगार पाता है,
भूगोल में इस शोधित अयस्क को धातु कहा जाता है।

जहा विपरीत स्वभाव गर्म और ठंडी धाराये आपस में मिल जाती है,
मछलियों के पनपने के लिए अनुकूल दशाये पाई जाती है ,
हमारे देश में यह जगह संसद कहलाती है,
यहाँ विचारो की त्रिव्रता के कारण चप्पले तक चल जाती है,
यह घटना घने कुहरे के कारण सांसद रूपी जहाजो का टकराव कहलाती है।

राजस्थान के भूगोल का यह हाल है,
हर वर्ष रहता कही न कही आकाल है,
खादी पहने रक्षक , भक्षक बनने पर उतारू है,
खनीज संपन्न यह राज्य आज भी बीमारू है।

अपूर्ण व्यवस्था और अंध-आस्था से हुई जन हानि को
महेरानगढ़ की दीवारे चिल्ला-चिल्ला कर कहेगी,
सच्चे मन से परमात्मा को याद करना फिर किसी मंदिर जाने की जरुरत न रहेगी।

फसलो से ज्यादा देश कर रहे है , हथियारों की फार्मिंग ,
कई कारणों से हो रही है ग्लोबल वार्मिंग ,
प्रदुषण रोकिये जनाब , ओजोन परत में छेद हो गया है ,
जब पूरी धरा ही एक है तो क्यों मानव और मानव में भेद हो गया है...................।


(साभार : सुमित)



सोमवार, 12 अक्टूबर 2009

ट्वीटर


कागजी बिछोने पर योजनाये सोती है ,

समस्याए हल सिर्फ टेबलों पर होती है ,

फाइलो की भीड़ में बंद पड़ी है नहरे ,

खड़ी फसल खेतो में पानी को रोटी है ,

दूर खडा बच्चा रोटी को तरसता है ,

इकोनोमी क्लास का नाटक करने वाला नेता ऐ /सी कार में शीशे बंद करके सोता है ,

राहुल, सचिन , उमर राजनीति करे ये उनकी बपोती है ,

आम आदमी को कुछ मत कहो थरूर साहब ,

उसकी तो तकदीर ही कहा

होती है .........

सोमवार, 1 जून 2009

प्रेम कहानी


हाल ही में मुझे सलाह दी गयी की मैं एक प्रेम कहानी लिखू , प्रेम भारत में theory का विषय रहा है , यहाँ सूफी साहित्यकारों ने प्रेम को अध्यात्म रंग में रंग दिया वे तो प्रेम में भगवान् ढूंढ़ते थे , भगवान् कृष्ण तो स्वयं अध्यात्म रंग में रँगे थे , अंग्रेजी साहित्य के शेली हो या हिंदी साहित्य के बिहारी , घनानंद , सभी ने प्रेम को एक नया रूप दिया .
मैं कुछ लिखता इससे पहेले मेरे सामने कहानी के पात्रो के चयन की समस्या आ गयी , मैं लैला-मंजनू , शिरी - फरहाद , रोम्यो - जूलियट जैसी कोई धांसू कहानी लिखना चाहता था , और इसके लिए मुझे ऐसी ही किसी जोड़ी की तलाश थी ,
कई दिन तक मैंने कॉलेज और मोहल्ले में अपनी तलाश जारी रखी , मैं किसी गुप्तचर की तरह गली मोहल्लो में फिरता रहा, मगर यहाँ कहानिया शुरु होने से पहेले ही खत्म हो जाती है , कुछ शोर्ट टाइप की कहानिया बनती है दीवारों पर प्रेम इजहार होता है जिसे आवारा हरकत बता दिया जाता है , उनके नाम अगर में अपनी कहानी में लिख दू तो लगेगा की मैं किसी पुलिस केस की परताल कर रहा हु,
वर्तमान भारत में प्रेम अस्थाई है , यहाँ प्रेम की कुछ नई परिभाषाये विकसित हुई है , सभ्य समाज में "DOSTANA" जैसे विषयों पर चर्चाये आम बात है , वर्तमान भारतीय बड़े प्रैक्टिकल हो गए है अब यहाँ ' लिविंग TOGETHER , 'लिव इन रिलेशनशिप' जैसे माध्यमो से साथ रहेकर यह तय करते है की उनके बीच प्रेम है या नहीं ,
आठवे दर्जे में पढ़ते समय गाव में घर पर बुजुर्गो को रामचरितमानस का पाठ सुनाया करता था , कई प्रसंगों को सुनकर वे भाव विभोर हो जाया करते थे , राम-सीता मिलन प्रसंग पर तो उनकी आँखों से अश्रुधारा बह जाया करती थी , ऐसा क्यों होता था मैं अब समझ पाया ,
मेरी कहानी के पात्रो की खोज अभी भी जारी थी , एक दिन कॉलेज में बता कुछ लिख रहा था वही एक स्टाइलिश लड़की आकर मेरे पास बेठ गई , "यु आर ओम ऍम आई राईट ?" "जी हा " हाउ आर यु ? FINE , एंड वाट अबाउट यु ? " मैं ठीक हु ,क्या कर रहे थे ?" "जी कुछ खास नहीं कविता लिखने की कोशिश कर रहा था ?" " हाउ स्वीट , आई ऍम कविता , क्या तुम मेरे लिए कुछ लिखोगे ?" प्रश्न बड़ा विकट था , जाहिर सा प्रेम निवेदन था , मुझे लगा की इस प्रेम कहानी का पात्र मैं ही बन रहा हू , लेकिन इस कविता को मैं अच्छी तरह जानता था , इससे पहेले भी कई सहपाठी कविता पर कविता लिख चुके थे , मैंने जिन्दगी के इकलोते प्यार को अस्वीकार कर दिया था ,
कुछ दिन मित्र मण्डली में हंसी का पात्र बना , लेकिन मुझे इसका कोई अफ़सोस नहीं था ,
एक दिन किसी उद्यान में बैठा था , तभी मेरी नजर एक लड़के और एक लड़की पर गई , दोनों एक दूसरे को काफी दूर से निहार रहे थे लड़की सभ्य दिखाई पड़ रही थी , मुझे यकायक राम-सीता का मधुर मिलन याद आ गया , ऐसा लगा की मेरी खोज पूरी हुई , दोनों निकट आये , थोरी देर बात हुई , शायद परिचय हुआ हो? अगले ही पल दोनों उद्यान से निकल चुके थे , दोनों बायक पर सवार हो मेरी नजरो से ओझल हो गए , उनका प्रेम भी परिणित हो चूका था , ये कहानी भी यही समाप्त हो चुकी थी
मगर मेरी प्रेम कहानी को पात्रो की दरकार अभी भी है ..................................,